शरद पूर्णिमा – क्या है ये खास दिन?
अगर आप कभी शरद ऋतु की रातों में चमकते चाँद को देखते हैं, तो समझिए कि वही शरद पूर्णिमा का जादू है। यह पूर्णिमा बस एक और तारीख नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ जुड़ा हुआ एक पुराना त्यौहार है। लोग इसे आध्यात्मिक शक्ति, फसल की बढ़ोतरी और मन की शांति से जोड़ते हैं।
शरद पौर्णिमा का महत्व
शरद ऋतु में दिन छोटा और रात लंबी हो जाती है, फिर भी इस महीने का सबसे उज्ज्वल दिन यही पूर्णिमा होता है। कई धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि यह समय मनुष्य के भीतर नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने का है। इसलिए लोग अक्सर इस दिन पूजा‑पाठ, दान‑धर्म और मंत्र जप करते हैं।
किसानों के लिए भी शरद पौर्णिमा खास महत्व रखती है क्योंकि यह फसल काटने से पहले की आखिरी पूर्णिमा होती है। कई गांवों में इस दिन नई फसल को घर ले जाकर माँगी जाती है, ताकि अगली साल का मौसम अच्छा रहे।
शरद पौराणिक कहानियाँ और त्यौहार
हिंदू मान्यताओं में शरद पूर्णिमा को ‘मोहिनी’ कहा जाता है, क्योंकि माना जाता है इस रात में देवी-देवता अधिक सक्रिय होते हैं। कुछ लोग इसे भगवान विष्णु के स्वरूप ‘श्री नरसिंह जी’ की पूजा का दिन भी मानते हैं और विशेष भोग लगाते हैं।
उत्तरी भारत में लोग इस रात को ‘कृष्णा द्विपदी’ के रूप में मनाते हैं, जहाँ घरों में कच्ची घी और मिठाई रखकर भगवान कृष्ण को अर्पित किया जाता है। दक्षिण में यह दिन ‘त्रिलोक नवरात्रि’ से जुड़ा हुआ माना जाता है, इसलिए कई मंदिरों में विशेष आरती होती है।
आजकल सोशल मीडिया पर लोग शरद पौर्णिमा के लिए विभिन्न रेसिपी, सजावट और फ़ोटो शेयर करते हैं। यदि आप भी कुछ नया ट्राय करना चाहते हैं तो घर की साफ‑सफाई कर, एक छोटा दीपक जलाएँ और चाँद को देखे हुए दिल से कोई सकारात्मक इरादा रखें। इस तरह आपका मन शांत रहेगा और रात में शांति महसूस होगी।
संक्षेप में, शरद पौर्णिमा सिर्फ़ एक तिथि नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ हमारा जुड़ाव दिखाती है। इसे सही ढंग से मनाने से ना केवल व्यक्तिगत लाभ मिलता है, बल्कि समाज में भी सकारात्मक ऊर्जा फैलती है। अगली बार जब चाँदनी रात आए तो याद रखें—शरद पौर्णिमा आपका स्वागत करती है, बस एक छोटी सी श्रद्धा और खुशी के साथ।